केसवानंद भारती बनाम केरल राज्य
संसद का संशोधन अधिकार; मूल संरचना सिद्धांत; गोलक नाथ अधिलेखित।
IRAC Analysis
क्या अनुच्छेद 368 के तहत संसद का अधिकार असीमित है, या संविधान की मूल संरचना की सुरक्षा से सीमित है।
13-न्यायाधीश पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 368 के तहत संसद संविधान संशोधित कर सकती है, परंतु इसकी “मूल संरचना” नष्ट नहीं कर सकती। लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, संघवाद और न्यायिक समीक्षा मुख्य उदाहरण हैं।